Sangya in Hindi – संज्ञा की परिभाषा भेद एवं उदाहरण

Sangya in Hindi – दोस्तों आज हमारी टीम आप लोगों के लिए संज्ञा से सम्बन्धित पूरी जानकारी लेकर आए हैं संज्ञा की परिभाषा, भेद और उदाहरण ”Sangya in Hindi” जो कि आप लोगों केलिए काफी महत्वपूर्ण जानकारी है तो आप लोग इस जानकारी को ध्यान पूर्वक पढ़ें क्योंकि यह बहुत सी प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए हैं तो आप लोगों को बता दें कि पूरी जानकारी नीचे विस्तार पूर्वक दी गई है जो कि आप लोगों के लिए उपयोगी साबित होगी तो आप लोग इस जानकारी को ध्यान पूर्वक पढ़ें।

Sangya ki Paribhasha

संज्ञा की परिभाषा भेद एवं उदाहरण {Sangya in Hindi}

संज्ञा की परिभाषा 

किसी वस्तु, प्राणी, स्थान, भाषा, अवस्था, गुण या दशा के नाम को संज्ञा कहते हैं संज्ञा शब्द का प्रयोग किसी वस्तु के लिए नहीं, अपितु वस्तु के नाम के लिए होता है जैसे- हिमालय, राम, दिल्ली, किताब, बीमार, गरीबी, कुत्ता, वन, फल, ज्ञान आदि।

संज्ञा के मुख्य रूप से तीन भेद होते हैं-

व्यक्तिवाचक संज्ञा

जातिवाचक संज्ञा

भाववाचक संज्ञा

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा

किसी व्यक्ति विशेष के नाम, स्थान विशेष के नाम और किसी वस्तु विशेष के नाम को व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। जिन शब्दों का प्रयोग किसी एक के लिए हो उन्हें व्यक्ति वाचक संज्ञा कहते हैं जैसे – मोहन (व्यक्ति विशेष), गंगा नगर (स्थान विशेष), सरस दुध (वस्तु विशेष), बीकानेर, भारत।

तथ्य

जो इस संसार में केवल एक हो उसके लिए प्रयुक्त नाम व्यक्ति वाचक संज्ञा होगा। जैसे – पृथ्वी, आकाश, सूर्य।

कुछ जातिवाचक संज्ञाएँ प्रसंग के अनुसार व्यक्ति वाचक संज्ञा मानी जाती है। जैसे – बोस ने कहा था तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा। यह बोस जाति वाचक संज्ञा है लेकिन यहाँ पर बोस का अर्थ सुभाष चन्द्र बोस से लिया गया है इसलिए यह व्यक्ति वाचक संज्ञा है। यंत्र के नाम निर्माता कंम्पनी के साथ आये तो व्यक्ति वाचक संज्ञा माने जाते हैं। जैसे – बजाज पंखा

जिस वस्तु, व्यक्ति या स्थान विशेष का नाम उसके जन्म को पश्चात रखा जाता है वह व्यक्ति वाचक होता है जैसे – जब किसी बच्चे का जन्म होता है तो उसका उस समय कोई नाम नहीं होता है जन्म के पश्चात उसका नाम राम, श्याम, कृष्ण, मोहन, सोहन रखा जाता है जो कि व्यक्ति वाचक संज्ञा है।

उदाहरण – वह आदमी गुजरात से आया रेखांकित में संया है –

  1. व्यक्ति वाचक
  2. जाति वाचक
  3. भाव वाचक
  4. स्थान वाचक

उत्तर – व्यक्ति वाचक

क्योंकि गुजरात का नाम गुजरात के बनने के बाद रखा गया था।

जतिवाचक संज्ञा

जिस संज्ञा से किसी प्राणी, वस्तु अथवा स्थान के वर्ग या उसकी जाति का ज्ञान हो, उसे जाति वाचक संज्ञा कहते हैं। जिन शब्दों का प्रयोग समुह के लिए किया जाता है उन्हें जाति वाचक संज्ञा कहते हैं जैसे – गाय, पहाड़, दूध, मेज, किताब, गधा, गुलाब, कमल।

तथ्य

कुछ व्यक्ति वाचक संज्ञाएँ जो प्रसिध्द एवं ऐतिहासिक नाम है प्रसंग के अनुसार जाति वाचक संज्ञा माने जाते हैं। जैसे- भारत में आज भी श्रवण कुमार पैदा होते हैं।

जिस वस्तु, व्यक्ति या स्थान का नाम उसके जन्म से पहले यानि जन्म जात हो उसे जाति वाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे जब कोई बच्चा पैदा होता है तो उसे बच्चा ही कहते हैं यह नाम उसका जन्म जात होता है जो हर एक बच्चे के लिए जन्म जात होता है इस लिए बच्चा एक जाति वाचक संज्ञा है।

उदाहरण – फुलों में गुलाब श्रेष्ट होता है रेखांकित में संज्ञा है

  1. जाति वाचक
  2. भाव वाचक
  3. व्यक्ति वाचक
  4. स्थान वाचक

उत्तर- जाति वाचक (क्योंकि गुलाब एक फूलों कि जाति है)

उदाहरण –  आजकल हर शहर में रावण पैदा हो रहे हैं में रावण में संज्ञा है –

  1. जाति वाचक
  2. भाव वाचक
  3. व्यक्ति वाचक
  4. स्थान वाचक

उत्तर – जाति वाचक (क्योंकि यहाँ रावण का प्रयोग किसी विशेष व्यक्ति के लिए न होकर बूरे व्यक्तियों के  समूह के लिए हुआ है।)

3. भाववाचक संज्ञा

किसी भाव, गुण, दशा अथवा अवस्था के नाम को भाव वाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – अमीरी, बुढ़ापा, दुख, अच्छा, प्रसन्नता, क्रोध, सौन्दर्य।

तथ्य

भाव वाचक संज्ञा किसी भी वस्तु, व्यक्ति या स्थान का एक गुण नहीं है बल्कि एक अधिक गुणों का समावेश है। जैसे गरीबी के लिए हम यह नहीं कह सकते हैं कि उसके पास गाड़ी नहीं है तो वो गरीब है या उसके पास गाड़ी नहीं है तो वो गरीब है या उसके पास मकान नहीं है तो वो गरीब है जब कई सारे गुण मिल जाते हैं तो भाव वाचक संज्ञा बनती है जैसे गरीबी के लिए उसके पास मकान न हो, खाने के लिए पैसे न हो पहनने के लिए कपड़े न हो आदि। हम किसी बी एक गुण को देख कर उसकी गरीबी या अमीरी का अंदाजा नहीं लगा सकते अतः भाव वाचक संज्ञा से जिसका बोध हो उन्हें महसुस किया जा सकता है किन्तु देखा नहीं जा सकता।

भाव वाचक संज्ञाएँ सभी प्रकार के शब्दों में प्रत्यय जोड़ कर बन जाती है।

1. व्यक्ति वाचक संज्ञा से भाव वाचक संज्ञा

राम + त्व – रामत्व

2. जाति वाचक संज्ञा से भाव वाचक संज्ञा

बुढ़ा + आपा – बुढ़ापा

3. सर्वनाम से भाववाचक संज्ञा

अपना + पन – अपनापन

मम + ता – ममता

अपना + त्व – अपनत्व

4. क्रिया से बनी भाव वाचक संज्ञा

घबराना – घबराहट

5. विशेषण से बनी भाववाचक संज्ञा

मिठा + आस – मिठास

सुन्दर + ता – सुन्दरता

Sangya in Hindi

उदाहरण – सुखी में संज्ञा है –

  1. जाति वाचक
  2. भाव वाचक
  3. व्यक्ति वाचक
  4. स्थान वाचक

उत्तर – जाति वाचक (क्योंकि हम किसी व्यक्ति को देख कर यह कह सकते है कि यह सुखी है और सुखी व्यक्तियों का समुह होता है अतः यह एक जाति वाचक संज्ञा है।)

तथ्य

कुछ विद्वान इन भेदों के अलवा दो भेद और मानते है – समुदाय वाचक व द्रव्य वाचक। परन्तु ये दोनों ही जाति वाचक संज्ञा के अन्तर्गत आते हैं।

समुदाय वाचक / समुह वाचक – जनता, भीड़, सभा, गोस्टी, सेना, कक्षा, पंचायत।

द्रव्य वाचक – पानी, दूध, चाँदी, सोना, गेंहूँ, मिट्टी, बजारी।

गणनीय संज्ञा व अगणनीय संज्ञा

गणनीय संज्ञा – ऐसी वस्तुएं जिनकी गणना की जा सके को गणनीय संज्ञा कहते हैं। जैसे – पुस्तक, लड़का, कमरा।

अगणनीय संज्ञा – ऐसी वस्तुएं जिनकी गणना नहीं की जा सके उन्हें अगणनीय संज्ञा कहते हैं। जैसे – पानी, दूध, सोना, प्रेम।

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