Suffix In Hindi – प्रत्यय की परिभाषा भेद और उदाहरण

Pratyay in Hindi – दोस्तों आज हम आप लोगों के लिए कुछ महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आए हैं जो कि हिन्दी व्याकरण में से लेकर आए हैं ”Pratyay in Hindi”, Suffix in Hindi लेकर आए हैं जो कि आप लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है तो आप लोग इस टॉपिक को ध्यान पूर्वक पढ़ें क्योंकि आप अगर ध्यान पूर्वक पढ़ेगें तो आपको अच्छे से समझ में आएगा। हम आप लोगों को बता दें कि यह बहुत सी Competitive Exam में काफी पूछे जाते हैं और भी बहुत सी प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए हैं तो इस लिए आप अगर किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए यह बहुत उपयोगी साबित होगा तो आप  लोग इसे जरूर पढ़ें।

Pratyay in Hindi

प्रत्यय की परिभाषा भेद और उदाहरण

‘जो शब्दांश, किसी शब्द के अंत में जोडे़ जाते हैं और जिनके जुड़ने से शब्द का अर्थ बदल जाता है, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। इन शब्दांशों का स्वतन्त्र रूप से प्रयोग नहीं होता’।

‘प्रत्यय वह शब्द होता है, जो शब्द के अंत में लगता है। प्रत्यय और उपसर्ग में अंतर यह है कि उपसर्ग जहाँ शब्दों के पहले लगता है, वहीं प्रत्यय शब्द के बाद में’।

प्रत्यय के उदाहरण हैं-

लघु + ता = लघुता

बुरा + आई = बुराई

चिकना + हट = चिकनाहट

ऊपर के उदाहरणों में ता, आई एवं हट प्रत्यय है। जहाँ ध्यान रखने की बात है कि प्रत्ययों के जुड़ने से शब्द के अर्थ एवं रूप में विशेष नहीं, बल्कि थोड़ा सा ही अंतर आता है और वह विशेषण से संज्ञा बन जाता है।

प्रत्ययों को रचना की दृष्टि से तीन वर्गों में विभाजित किया गया है –

(1) स्त्री प्रत्यय

(2) कृत प्रत्यय

(3) तध्दित प्रत्यय

1. स्त्री प्रत्यय ः वे प्रत्यय कहलाते हैं, जो पुल्लिंग शब्दों के साथ लगकर उन्हें स्त्री लिंग में परिवर्तित कर देते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रत्यय हैं – ‘ई’और ‘आनी’। उदाहरण के लिए ः

लड़का + ई = लड़की

सेठ + आनी = सेठानी

बेटा + ई = बेटी

शेर + नी = शेरनी

2. कृत प्रत्यय ः कृत प्रत्यय उन्हें कहते हैं, जो धातुओं के साथ लगकर उन्हें संज्ञा या विशेषण बना देते हैं। इस प्रत्यय की एक महत्वपूर्ण पहचान यह होती है कि इसमे लगने के बाद बने हुए शब्द से किसी कार्य को करने वाले, अर्थात् कर्ता का बोध होने लगता है।

इस वर्ग के अन्तर्गत अधिकांशः ‘अक’, ‘वैया’, ‘वाला’, तथा ‘इय’ आदि प्रत्यय आते हैं। उदाहरणार्थ –

दा + अक = दायक

गाड़ी + वान = गाड़ीवान

खेलना + आड़ी = खिलाड़ी

पीना + अक्कड़ = पिअक्कड़

भागन + ओड़ा = भगोड़ा

लड़ना + आकू = लड़ाकू

पालना + हारा = पालनहारा

कारी + गर = कारीगर

घर + वाला = घरवाला

जमीं + दार = जमींदार

सोना + आर = सुनार

भंडार + ई = भंडारी

साँप + एरा = सँपेरा

मदद + गार = मददगार

3. तध्दित प्रत्यय ः वे शब्द तध्दित प्रत्यय कहलाते हैं, जो कुछ शब्दों (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण) के साथ लगकर उनके शब्द रूप को बदल देते हैं। इसे हम इस प्रकार भी कह सकते हैं कि ये प्रत्यय संज्ञा, विशेषण, सर्वनाम आदि में ही लगते हैं इसके कुछ उदाहरण हैं –

लठ + ऐत = लठैत

कुल + ईन = कुलीन

मुख + औटा = मुखौटा

लोटा + इया = लुटिया

महत् + इमा = महिमा

कड़वा + हट = कड़वाहट

दवा + खाना = दवाखाना

खाट + इया = खटिया

एक + ता = एकता

अच्छा + आई = अच्छाई

अपना + पन = अपनापन

शिक्षा + अक = शिक्षक

पुरूष + एय = पौरूषेय

अग्र + इम = अग्रिम

पीछे पड़ने वाली गलतियाँ…

प्रत्यय संबंधी अशुद्धियाँ

प्रत्यय संबंधी गलतियाँ अधिकांशतः देखने को मिलती हैं। ये गलतियाँ प्रायः शब्दों के साम्य के कारण होती देखी गई हैं, जैसे – ‘मौलिक’ में ‘ता’ प्रत्यय लगाने से ‘मैलिकता’ बनता है। इसी के साम्य पर अब ‘पंडित्यता’ ‘सौन्दर्यता’ तथा ‘कौशलता’ जैसे शब्द बनाए जाने लगे हैं। ऐसे शब्दों में अशुध्दि यह है कि एक साथ दो प्रत्ययों का प्रयोग किया गया है ये दो प्रत्यय हैं – ‘य’ तथा ‘ता’। जैसे- पंडित + ता से बना ‘पंडित्यता’। इस प्रकार पंडित्यता में य और ता दो -दो प्रत्यय हो गए।

1 दुहरे प्रत्ययों की गलतियाँ

दुहरे प्रत्ययों के प्रयोग से बनने वाले अन्य कुछ अशुध्द शब्द हैं-

अशुद्ध   शुद्ध

अगुणीय – अगुणी

पुज्यनीय – पूज्य, पूजनीय

ग्रामीणवासी – ग्रामीण, ग्रामवासी

मान्यनीय – माननीय

उदण्डी – उदण्ड

साभ्यता – साभ्य

सार्वभौमिक – सार्वभौम

गोप्यनीय – गोपनीय

नैपुण्यता – नैपुण्य

मानवीयता – मानवीय

सम्मर्कित – साम्पृक्त

व्यापित – व्याप्त

धैर्यता – धैर्य

उत्कर्षता – उत्कर्ष

2 लिंग – विधान के प्रत्ययों की गलतियाँ ः

हिन्दी में लिंग विधान के लिए सामान्यतः ई, इया, नी, इन आदि प्रत्ययों का प्रयोग किया जाता है। कौन- सा प्रत्यय किस शब्द के साथ लगेगा, इसका समुचित ज्ञान न होने के कारण स्त्री लिंग वाचक अनेक शब्द अशुध्द हो जाते हैं। इस प्रकार के कुछ शब्द हैं –

अशुद्ध     शद्ध

अनाथिनी – अनाथ

चतुरिणी – चतुरा

श्वेतांगिनी – श्वेतांगी

विहांगिनी – विहंगी

गोपिनी – गोपी

कोमलांगिनी – कोमलांगी

कवित्रीणी – कवयित्री

अध्यापका – अध्यापिका

भुजंगनी – भुजंगी

सम्राटिनी – सम्राज्ञी

3 बहुवचन संबंधी प्रत्ययों की गलतियाँ ः

कभी – कभी बहुवचन के प्रत्ययों में पुनरूक्ति के कारण शब्द में अशुद्धि आ जाती है। ऐसी सबसे अधिक गलतियाँ उर्दू के शब्दों को बहुवचन बनाने में होती है।

वस्तुतः इनमें होता यह है कि हम एक साथ बहुवचन के दो प्रत्ययों का उपयोग कर बैठते हैे। पहला प्रत्यय उर्दू का होता है तथा दूसरा प्रत्यय हिन्दी का होता है ऐसा करके हम उर्दू के उस शब्द को हिन्दी के शब्द के साम्य पर ले आते हैं, जो गलत है। उदाहरण के लिए – कागज+ आत = कागजात। कागजात शब्द अपने आप में बहुवचन का द्योतक है लेकिन हमारे मस्तिष्क में हिन्दी के शब्दों का स्वरूप इस तरह जड़ जमाकर बैठा हुआ है कि हमें लगता है कि कोई शब्द तब तक बहुवचन नहीं हो सकता, जब तक कि उसके अंत में इयाँ (लड़कियाँ), ओं (लड़कों), ए (लड़के) जैसे प्रत्यय न आएँ। इसलिए हम कागजात के साथ हिन्दी का ओं प्रत्यय जोड़कर उसे कागजातों बना देते हैं। इसके ही अनुकूल हम हालतों बना देते हैं, जो गलत है।

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