Kumbh Mela 2018-2019 Date । कुंभ मेला साही स्नान तिथियॉ

Mahakumbh mele ki jankari hindi me महाकुम्भ मेले की पूरी जानकारी हिन्दी में– नमस्कार दोस्तों आज हम आप लोगों के लिए कुम्भ मेले की जानकारी को प्रस्तुत किया है। तो आप इस जानकारी को ध्यान पूर्वक पढ़ें। कुम्भ पर्व हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है। जिसमें लाखो करोणों श्राध्दालू भक्त कुम्भ पर्व स्थल पर हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में स्नान करते हैं। इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति 12 वर्ष के पूर्ण महाकुम्भ का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा कुम्भ का पर्व चार भागों में बांटा हुआ है। जैसा कि पहला कुम्भ हरिद्वार में होता है।

तो ठीक उसके तीन वर्ष के बाद दूसरा  कुम्भ प्रयाग में होता है। और इसके बाद तीसरा कुम्भ उज्जैन में होता है। और तीन साल बाद चौथा कुम्भ नासिक में होता है। ठीक इसी तरह जब चार कुम्भ को मिलाकर 12 वर्ष पूर्ण हो जाता है। तब महा कुम्भ का आयोजन किया जाता है। जो कि 12 वर्षों में एक बार मनाया जाता है। इसके अलावा हरिद्वार और प्रयाग में दो कुम्भ पर्वों के बीच 6 वर्ष के अन्तराल में अर्ध्द कुम्भ मनाया जाता है। आखरी अर्ध्द कुम्भ हरिद्वार में 2016 में मनाया गया था।

kumbh mela 2019

Kumbh 2018-2019

कुम्भ पर्व चार स्थानों पर ही क्यों मनाया जाता है, आपको पता है कि महाकुम्भ का आयोजन प्रत्येक 12 वर्ष में हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में ही क्यों मनाया जाता है। आखिर क्यों इतने भीड़ में नागा बाबा साधू संत इस पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं। आखिर क्या लिखा है पुराणों में महाकुम्भ के बारे में आज हम इम सारी बातों को जानेगें। कुम्भ मेला एक ऐसा पर्व है ऐसा त्योहार है। जिसे अगर कोई अपने आँखों से न देखले वो इसका महत्व औऱ उल्लास नहीं समझ सकता है।

महाकुम्भ के बारे में

जिसने खुद कुम्भ के अदभुत और पवित्र वातावरण को प्रत्यक्ष देखा और महसूस किया है।कुम्भ के पावन पर्व पर चारों ओर श्राध्दालुओं की भीड़ साधू, विद्वान और ऋषि मुनि और श्राध्दलू जन मेले के दौरान पवित्र जल में डुबकी लगाकर खुद को पवित्र करते हैं। कहते हैं कि आज के लोगों के लिए कुम्भ मेला वह है। जहाँ जाकर पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं।और पापों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। और चाहते हैं कि भगवान उन्हें मोक्क्ष प्रदान करें। पर कुम्भ का महत्व यहीं तक सीमित नहीं है।

कुम्भ पर्व का इतिहास

आखिर कुम्भ पर्व की शुरूआत कब हुई हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में ही क्यों मनाया जाता है। इसकी कहानी समुन्द्र मंथन से जुड़ी हुई है। कहते हैं कि महाऋषि र्दुवासा के श्राप के कारण जब इन्द्र अन्य देवता कमजोर पड़ गए थे। तब दैत्यों ने देवताओं पर आक्रमण कर परास्त कर दिया था। तब सब देवता मिलकर भगवान विष्णू के पास पहुँचे और उन्हें सारा वित्रांत सुनाया भगवान विष्णू ने दैत्यों के साथ क्षीर सागर का मंथन करके अमृत निकालने की सलाह दी। भगवान विष्णू के ऐसा कहने पर सम्पूर्ण देवता दैत्यों के साथ संधी करके अमृत निकालने के यत्न में लग गए। अमृत कुम्भ के निकलते ही देवताओं के इसारे से इन्द्र पुत्र जयंत अमृत को लेकर आकाश में उड़ गया। उसके बाद दैत्य गुरू शुक्राचार के आदेशानुसार दैत्यों ने अमृत को वापस लाने के लिए जयंत का पीछा किया।

और घोर परिश्रम के बाद उन्हों ने जयंत को बीच रास्ते में पकड़ लिया। उसके बाद अमृत कलश पर अधिकार जमाने के लिए देव और दानव में 12 दिन तक युध्द होता रहा। कहते हैं कि युध्द के दौरान प्रथ्वी पर चार स्थानों पर कलश से अमृत बूँदें गिरी थी। जिनमें से पहली बूँद प्रयाग में गिरी तो दूसरी शिव नगरी हरिद्वार पर गिरी। इसके बाद तीसरी बूँद उज्जैन में तो चौथी बूँद नासिक में गिरी यही कारण है। कि कुम्भ मेले को इन्हीं चार स्थानों पर मनाया जाता है। देवताओं के 12 दिन मनुष्यों के 12 वर्ष के तुल्य होते हैं। अत: कुम्भ भी 12 होते हैं। उनमें से चार कुम्भ प्रथ्वी पर होते हैं। और शेष कुम्भ देवलोक में होते हैं। जिन्हें देवगण ही प्राप्त करते हैं।

कुम्भ पर्व की आयोजन तिथि

अब ज्योतिष के अनुसार जानते हैं कि आखिर कुम्भ पर्व की आयोजन की तिथि और जगह कैसे निर्धारित की जाती है। कहते हैं कि कुम्भ मेले में सूर्य एंव व्रहस्पति का खास योगदन माना जाता है। सूर्य देव औऱ व्रहस्पति जब एक राशि से दूसरी राशि मे प्रवेश करती है। तभी कुम्भ मेले को मनाने का स्थान एंव तिथि का चुनाव किया जाता है। तो इसी के अनुसार जब सूर्य मेष राशि और व्रहस्पति कुम्भ राशि में आता है। तब यह मेला हरिद्वार में मनाया जाता है। जब व्रहस्पति वृषभ राशि मे प्रवेश करता है। और सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। तो यह उत्सव प्रयाग मे मनाया जाता है। जब व्रहस्पति सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश होता है।

तो यह महान कुम्भ मेंला महाराष्ट्र के नासिक में मनाया जाता है। इसके अलावा यदि व्रहस्पति एंव चन्द्रमा तीनों कर्क राशि में प्रवेश करें और साथ ही आमावश्या का दिन हो तब भी कुम्भ नासिक मे मनाया जाता है। अन्त में कुम्भ मेला उज्जैन में मनाया जाता है। जब व्रहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करे और सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करे औऱ सूर्य देव का सिंह राशि में प्रवेश होने के कारण मध्य प्रदेश के उज्जैन में मनाया जाने वाला कुम्भ सिंहस्त कुम्भ कहलाता है। पिछला सिंहस्त कुम्भ अप्रैल 2016 में आयोजित किया गया था। यह पर्व 12 वर्षो के पश्चात उज्जैन के भूमि पर मनाया गया था।

पौराणिक कथाओं के अनुसार

पौराणिक कथाओं के अनुसार अमृत कलश से जो चार बूँद धरती पर गिरी थी। वहाँ नदी ने रूप ले लिया यह चार पवित्र नदियाँ हैं। हरिद्वार में गंगा, नासिक में गोेदावरी, इलाहाबाद में संगम यानि गंगा, यमुना और सरस्वती और उज्जैन में सिप्रा नदी। सिप्रा नदी की भी अपनी महिमा औऱ महत्व है। गंगा, यमुना और सरस्वती जैसी नदियों की तरह सिप्रा नदी भी महान है। सिप्रा नदी को पहाड़ों से बहने वाली नदी भी कहाजाता है। लेकिन मान्यता के अनुसार यह नदी धरती की कोख से जनमी थी। कहते हैं कि इस नदी का जल इतना पवित्र है। कि इसमे स्नान करने वाले लोगों के सभी कष्ट और दुख दूर हो जाता है। औऱ जीवन में खुशहाली आती है।

स्कन्ध पुराण में यह उल्लेख मिलता है। कि सभी नदियाँ उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है। लेकिन सिप्रा नदी एक ऐसी नदी है। जो उत्तर गामी है। यानि की उत्तर दिशा की ओऱ बहने वाली नदी यह नदी चम्बल उप नदी में मिल जाती है। कुरमा पुराण के अनुसार कुम्भ उत्सव में स्नान करने से सभी पापों का विनाश होता है। और मनोवांक्षित फल प्राप्त होता है। यहाँ स्नान से देवलोक भी प्राप्त होता है। भविष्य पुराण के अनुसार कुम्भ स्नान से पुन्य स्वरूप स्वर्ग प्राप्त होता है। और मोक्क्ष की प्राप्ति होती है। तो दोस्तों आप अपने जीवन काल में एक बार कुम्भ स्नान जरूर कीजिए।

Allahabad kumbh mela 2018-2019

प्रयाग : 2019 में प्रयाग नगरी इलाहाबाद में लगने वाले कुंभ मेले के शाही स्‍नान की Date को शनिवार को मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की मौजूदगी में किया गया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के मुताबिक प्रयाग में लगने वाले कुंभ मेले में पहला शाही स्‍नान 15 जनवरी, 2019 को मकर संक्रांति के दिन होगा। फिर वहां दूसरा शाही स्‍नान 4 फरवरी, 2019 को मौनी अमावस्‍या के दिन होगा। इसके बाद तीसरा और आखिरी शाही स्‍नान 10 फरवरी, 2019 को वसंत पंचमी के दिन किया जाएगा। शनिवार के दिन प्रयाग पहुंचे मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने शहर में कुंभ मेले को लेकर चल रही तैयारियों का जायजा भी लिया।

18 मई को इलाहाबाद में दिन शुक्रवार (18 मई) को आयोजित हुई अखाड़ों की बैठक में कुंभ में शाही स्‍नान के बहिष्‍कार का फैसला वापस ले लिया गया था। संगम नगरी प्रयाग में 2019 में होने जा रहे कुंभ मेले को लेकर शुक्रवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने अहम बैठक का आयोजन किया था। 13 अखाड़े अपनी मांगों के पूरा न होने के कारण प्रशासन और सरकार से नाराज चल रहे थे इसके चलते उन्‍होंने कुंभ 2019 में शाही स्‍नान के बहिष्‍कार की घोषणा की थी।

Shahi Snan Date 2019

2019 कुंंभ मेले की शाही स्नान की तारीख-

  • 14-15 जनवरी 2019: मकर संक्रांति (पहला शाही स्नान)
  • 21 जनवरी 2019: पौष पूर्णिमा
  • 31 जनवरी 2019: पौष एकादशी स्नान
  • 04 फरवरी 2019: मौनी अमावस्या (मुख्य शाही स्नान, दूसरा शाही स्नान)
  • 10 फरवरी 2019: बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान)
  • 16 फरवरी 2019: माघी एकादशी
  • 1 9 फरवरी 2019: माघी पूर्णिमा
  • 04 मार्च 2019: महा शिवरात्री

इसे भी जरूर पढ़ें-

तो दोस्तों हमारी कुम्भ मेले पूरी जानकारी हिन्दी में आपको कैसी लगी आशा करता हूँ कि आपको अच्छी लगी होगी। अगर आपको इससे सम्बन्धित या अन्य कोई जानकारी चाहिए। तो आपलोग नीचे दिए गए Comment Box के माध्यम से सूचना पहुँचा सकते हैं।

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!