Kriya in Hindi-क्रिया की परिभाषा भेद एवं उदाहरण (Verb in Hindi) Hindi Grammar

क्रिया की परिभाषा भेद एवं उदाहरण (Verb in Hindi) ”Kriya in Hindi” – दोस्तों जैसा की आप लोगों को पता होगा की हमारी टीम आप लोगों के लिए Study Material लेकर आती है तो आज हम आप लोगों के लिए क्रिया की परिभाषा भेद एवं उदाहरण लेकर आए हैं जो कि आप लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है जो कि बहुत सी प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं तो आप लोग इस जानकारी को ध्यान पूर्वक पढ़ें ताकि आपको यह बहुत अच्छे से समझ में आ जाए। हम आप लोगों को बता दें की नीचे दी गई पूरी जानकारी आपके लिए बेहद मदद गार साबित होगी तो आप पूरा पढ़ें।

Verb in Hindi

क्रिया की परिभाषा भेद एवं उदाहरण

क्रिया

वे शब्द, जिनके द्वारा किसी कार्य का करना या होना पाया जाता है, उन्हें क्रिया पद कहते हैं। जैसे – खाना, पिना, हँसना, बोलना।

प्रकार

कर्म के आधार पर

कर्म के आधार पर क्रिया के मुख्यतः दो भेद हैं

  1. अकर्मक क्रिया
  2. सकर्मक क्रिया

अकर्मक क्रिया

वे क्रिया जिनको करने के लिए कर्म की आवश्यकता नहीं होती अकर्मक क्रिया कहलाती है। जैसे – पक्षी उड़ता है।, बच्चा रोता है।, राधा नाचती है।, हवा चलती है।

सकर्मक क्रिया

वे क्रिया जिनको करने के लिए कर्म की आवश्यकता होती है सकर्मक क्रिया कहलाती है। जैसे – लड़का पढ़ता है।, मोहन खाना बना रहा है।, बच्चे टी. वी. देख रहे हैं।

तथ्य

जिन वाक्यों में क्रिया करने के लिए कर्म की आवश्यकता होती है। जैसे खाना बनाने के लिए खाने की आवश्यकता है। पढ़ने के लिए किताब की आवश्यकता है। जिन वाक्यों में क्या, किसको, आदि से प्रश्न करने पर संतोष जनक उत्तर मिल जाए वे क्रियाऐं सकर्मक होती है, तथा उत्तर उस क्रिया का कर्म होता है।

एक कर्मक क्रिया

जब वाक्यों में क्रिया के साथ एक कर्म प्रयुक्त हो तो उसे एक कर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे – महेश ने फल खरीदे।

द्विकर्मक क्रिया

कभी कभी वाक्य में दो कर्म होते हैं एक गौण कर्म व दूसरा मुख्य कर्म।

गौण कर्म – यह क्रिया से दूर होता है प्राणि वाचक होता है। तथा विभक्ति सहित होता है।

मुख्य कर्म – यह क्रिया के पास होता है, अप्राणी वाचक होता है, विभक्ति रहित होता है। जैसे – शीना ने रीना को पुस्तक दी। यहाँ रीना गौण कर्म है तथा पुस्तक मुख्य कर्म है।

प्रयोग तथा संरचना के आधार पर इसके आधार पर भी क्रिया के निम्न भैद होते हैं-

सामान्य क्रिया

जब किसी वाक्य में एक ही क्रिया का प्रयोग हुआ हो, उसे सामान्य क्रिया कहते हैं जैसे – लड़का पढ़ता है।

पूर्वकालिक क्रिया

जब किसी वाक्य में दो क्रियाएँ प्रयुक्त हुई हों तथा उनमें से एक क्रिया दूसरी क्रिया से पहले सम्पन्न हुई हो तो पहले सम्पन्न होने वाली क्रिया पूर्व कालिक क्रिया कहलाती है। जैसे – मैं खाना पका कर पढ़ने लगा। यहाँ पढ़ने से पूर्व खाना पकाने का कार्य हो गया अतः पकाना क्रिया पूर्व कालिका क्रिया कहलाएगी।

प्रेरणार्थक क्रिया

वे क्रियाएँ, जिन्हें कञ्ता स्वयं न करके दूसरों को क्रिया करने के लिए प्रेरित करता है, उन क्रियाओं को प्रेणार्थक क्रिया कहते हैं। जैसे – दूष्यन्त हेमन्त से पत्र लिखवाता है। कविता सविता से पत्र पढ़वाती है।

सजातीय क्रिया

वे क्रियाएँ, जहाँ कर्म तथा क्रिया दोनों एक ही धातु से बनकर साथ प्रयुक्त होती हैं। जैसे – हमने खाना खाया।

काल (काल के अनुसार)

क्रिया के होने का समय काल कहलाता है।

काल के मुख्यतः तीन भेद होते हैं

  1. भूत काल
  2. वर्तमान काल
  3. भविष्य काल

भूत काल

बीते समय का बोध कराने वाली क्रियाएँ भूत कालिक क्रिया कहलाती है।

भूत काल के मुख्यतः छः भेद होते है।

(क) सामान्य भूत काल

(ख) आसन्न भूत काल

(ग) पूर्ण भूत काल

(घ) संदिग्ध भूत काल

(ड़) अपूर्ण भूत काल

(च) हेतु -हेतुमद् भूत काल

(क) सामान्य भूत काल

जब बीते समय का बोध कराने वाली क्रिया का केवल एक शब्द आए तो वहाँ सामान्य भूत काल होता है। जैसे – गया, पढ़ा, लिखी, देखे।

उदाहरण – मैनें राजस्थान वेब साइट देखी।

(ख) आसन्न भूत काल

सामान्य भूत काल की क्रिया के अन्त में है, हैं, हो, हूँ आये तो आसन्न भूत काल होगा। जैसे – गया है, लिखी है, देखे हैं, गया हूँ।

उदाहरण – मैनें राजस्थान पर कहानी लिखी है।

(ग) पूर्ण भूत काल

सामान्य भूत काल की क्रिया के अन्त में था, थे, थी, आ जाये तो पूर्ण भूत काल होगा। जैसे – गाय था, पढ़ी थी, लिखे थे।

उदाहरण -हमने बचपन में खेल खेले थे।

(घ) संदिग्ध भूत काल 

सामान्य भूत काल के क्रिया के अन्त में होगा, होंगे, होगी आये तो संदिग्ध भूत काल होता है। जैसे – गया होगा, पढ़ी होगी, लिखे होंगे।

उदाहरण – तुमने किताब पढ़ी होगी।

(ड़) अपूर्ण भूत काल

क्रिया के अन्त में रहा था, रही थी, रहे थे, आये तो अपूर्ण भूत काल होता है। जैसे – जा रहा था, खा रहा था, हस रहे थे।

उदाहरण – जब मैं वहाँ से गुजरा तो बच्चे खेल रहे थे।

(च) हेतु – हेतुमदे भूत काल

बीते समय कि एक क्रिया का होना जब बीते समय की दूसरी क्रिया पर आश्रित हो तो वहाँ हेतु – हेतुमद् भूत काल होता है।

उदाहरण – बरसात होती तो फसलें पक जाती।

वाक्य में फसलें पकना बरसात होने पर आश्रित थी अतः न बरसात हुई और न ही फसलें पकी।

एक महीना और पढ़ता तो चयन हो जाता।

वर्तमान काल

पाँच भेद होते हैं-

(क) सामान्य वर्तमान काल

क्रिया के अन्त में ता है, ती है, ते है आए तो सामान्य वर्तमान काल होगा। जैसे – पढ़ता है, लिखती है, जाते हैं, हँसते हैं, नाचते हैं।

उदाहरण – मोहन पांचवी कक्षा में पढ़ता है।

(ख) अपूर्ण वर्तमान काल

क्रिया के अन्त में रहा है, रही है, रहे हैं, आये। जैसे – पढ़ रहा है, लिख रहा है, जा रहे हैं।

उदाहरण – वह गाना लिख रहा है, सोहन पढ़ रहा है।

(ग) संदिग्ध वर्तमान काल

वर्तमान काल की क्रिया के अन्त में होगा, होंगे, होगी आए तो संदिग्ध वर्तमान काल होता है। जैसे – पढ़ रहा होगा, लिख रही होगी, देख रहे होंगे।

उदाहरण – राम किताब लिख रहा होगा, मोहन पढ़ रहा होगा, सीता लिख रही होगी।

(घ) संभावय वर्तमान काल 

वर्तमान काल की क्रिया से पहले शायद, संभवत, लगता है, हो सकता है आदि संभावनावाची शब्द आ जाये तो संभावय वर्तमान काल होता है।

उदाहरण – लगता है कोई हमारी बतें सुन रहा है, शायद कोई बाहर खड़ा है।

(ड़) आज्ञार्थक वर्तमान काल

आज्ञार्थक क्रियाओं का प्रयोग मुख्यतः आज्ञार्थ वर्तमान काल में ही होता है। जैसे – पढ़, पढ़ो, पढ़े, पढ़ें पढ़ु।

उदाहरण – तु लिख, तुम हंसो, वह गांव जाए, वे यहां खेले, मैं गांव से कब आऊँ?

Verb in Hindi

भविष्यत काल

आने वाले समय का बोध कराने वाली क्रियाऐं भविष्यत् कालिक क्रिायाएं कहलाती है।

मुख्यतः तीन भेद

(क) सामान्य भविष्यत् काल

(ख) आज्ञार्थ भविष्यत् काल

(ग) संभाव्य भविष्यत् काल

(क) सामान्य भविष्यत् काल

जब क्रिया के अन्त में एगा, एगी, एंगे आये तो सामान्य भविष्यत काल होता है। जैसे – वह पढ़ेगा, गीता लिखेगी, वे सुनेंगे।

उदाहरण – कल वह राजस्थान के बारे में पढ़ेगा। आज रमेश नेता जी का भाषण सुनेगा।

(ख) आज्ञार्थ भविष्यत् काल

क्रिया के अन्त में इएगा आये तो आज्ञार्थ भविष्यत् काल होगा। जैसे – पढिएगा।

उदाहरण – इस बात पर विचार करियेगा।

(ग) संभाव्य भविष्यत काल 

क्रिया के अन्त में ए, ऐ, ओ, ऊ आये तथा क्रिया से पूर्व संभावनावाची शब्द शायद, संभवत, लगता है, तो सकता है आ जाये तो संभाव्य भविष्यत् काल होगा।

उदाहरण – संभवत कल पिता जी आये। हो सकता है मोहन बाजार जाये।, शायद में गांव जाऊँ।

(*) हेतु – हेतुमद् भविष्यत काल

जब भविष्यत् काल की एक क्रिया का होना भविष्यत् काल की दूसरी क्रिया पर आश्रित हो तो हेतु – हेतुमद् भविष्यत् काल होता है।

उदाहरण – जो परिश्रम करेगा वह सफल होगा।, जैसा कार्य करेंगे वैसा फल मिलेगा।

तथ्य

हेतु – हेतुमद् भविष्यत् काल के कुछ हि जानकार मानते है लेकिन मुख्यतः भविष्यत् काल के केवल तीन भेद होते हैं।

उदाहरण – राम ने पत्र पढ़ लिाय होगा- संदिग्ध भूत काल, राम पत्र पढ़ रहा होगा – संदिग्ध वर्तमान, मोहन गांव से शहर आाया है – आसन्न भूत काल।

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तो दोस्तों कैसी लगी हमारी Kriya in Hindi क्रिया की परिभाषा भेद एवं उदाहरण की यह पूरी जानकारी आशा करते हैं आप सभी पाठकों को काफी पसंद आई होगी तो आप लोग इस जानकारी को अपने मित्रों के साथ शेयर करके उनकी भी मदद कर सकते हैं और अगर आपको किसी प्रकार का सवाल या जवाब हो या आपको इससे सम्बन्धित कोई जानकारी या अन्य जानकारी चाहीए तो नीचे दिए गए Comment Box के माध्यम से Comment कर सकते हैं। धन्यवाद

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